बुधवार, १ सप्टेंबर, २०१०

jagan


जगन यह मेरे सालेका नाम है। मुझे चार साले थे । जगन दो नंबर का है। उसके दो भाई मर गए। जगन माँ का सब से प्यारा है। माँ तो नहीं रही। माँ जाने से बहुत दिन तक ओ गुम्सुम्रहता था अब संभल चूका है। वह बहुत ही मेहनती है। पुराणी आठवी कक्षा पास होने के कारन इंग्लिश बड़े चाव से बोलते रहता है। पुराने फ़िल्मी गाने उसे बहुत यद् है। जब उसका मूड होता है तो हमेशा गाने गुनगुनाते रहता है।
उसकी पहलीवाली न रहने से उसने दूसरी घरवाली ली। जब दूसरी लायी तो वह कहता था मेरी घरवाली चंदासी सुन्दर है। उसके सुन्दरता के पुल बंधाते वह थकता नहीं। पहली से उसे दो लडके है और दूसरी से दू लड़किया और एक जवान लड़का है। सभी ब्याहते है। अब तो पोते भी आने लगे है। आमतौरपर खुशिया ही खुशिया दिखती है।
वह दाभादी के गिरना कारखाने में कम करता था अब रिटायर हो गया है । सब लडके कमाते होनेसे कोई जिम्मेवारी नहीं है। सब जगन को जगनराव नाम से पुकारते रहते है. ।
                      वाह दिसम्बर  2016 से बिमार पडा ।उसकी श्रीमती ने बहुत सेवा की ।परं क्या करे आयु का तकाजा होता है ,तो जाणा ही पडत है ।होनी को कोई ताल नाही सकता । जगन को भी  जाणा पडा ।15 फरवरी 2017 को उसने इस दुनिया से बीदा ली । 
 महात्मा फुले ज्येष्ठ नागरिक सेवाभावी संस्था पाटणे कि कार्यकारिणी , विश्वास्थ मंडल और दभासद किओर से उन्हे श्रद्धांजली अर्पण करते है । परमात्मा उनकी आत्मा को मुक्ती प्रदान करे यही  प्रार्थना ।

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