कन्हैय्या इसका सही नाम वैभव है। जन्म जो की जन्माष्टमी को हुवा है इसीलिए सब उसे कन्हैय्या कहते है। और यही नाम बहुत प्यारा लगता है। उसका चलन भी कन्हैय्या जैसा ही नटखट है। अब वह सतरा का हो गया फिर भी खुद को बालक ही समझता है। दादी माँ हो या उस की माँ किसी से उस की बनती नहीं।
अब वहबच्चा तो रहा नहीं .फिर बच्चा जैसा बर्ताव क्यों करता है। उसकी दादी कहती है किसी वैद को बुलावा भेजो या किसी ब्राहमण के पास जाकर उसकी कुण्डली देखे। इसके बावजूद वह पढाई में असाधारण है। एस एस सी में उसने अच्छे अंक निकाले और उसे इलेक्ट्रोनिक्स से चाव जो है वह इंजिनियर बनना चाहता है। आज उसका जन्म दिन है । हम सभी खुशिया उसे देना चाहते है। तुम जियो हजारो साल ; हर साल के दिन हो पचास हजार।
अब वहबच्चा तो रहा नहीं .फिर बच्चा जैसा बर्ताव क्यों करता है। उसकी दादी कहती है किसी वैद को बुलावा भेजो या किसी ब्राहमण के पास जाकर उसकी कुण्डली देखे। इसके बावजूद वह पढाई में असाधारण है। एस एस सी में उसने अच्छे अंक निकाले और उसे इलेक्ट्रोनिक्स से चाव जो है वह इंजिनियर बनना चाहता है। आज उसका जन्म दिन है । हम सभी खुशिया उसे देना चाहते है। तुम जियो हजारो साल ; हर साल के दिन हो पचास हजार।

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उत्तर द्याहटवा